Saturday, 3 June 2017

भारत के रहस्यमय स्थान || Mysterious Places in India




सोने की चिड़िया कहे जाने वाले भारत को एक रहस्यमय तंत्र मंत्र वाला देश भी माना जाता है हिंदु कुश पर्वत माला से लेकर अरुणाचल तक और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक देश में कई रहस्य दर्पण अल्लाह की समय के साथ-साथ भारत विज्ञान और तकनीकी में भी विकसित होता चला गया लेकिन भारत में आज भी कई ऐसी जगह है जो अपने दामन में कई रहस्यों को समेटे हुए हैं जिनके बारे में शायद आप भी नहीं जानते होंगे हेलो दोस्तों में हो शरद और आप देख रहे हैं इंडियन स्ट्रीट आज आपको परिचित करवाते हैं देश के कुछ रहस्य और रोमांच से भरी स्थानों से अजंता एलोरा की गुफाएं गुफाएं तो भारत में बहुत है लेकिन अजंता एलोरा की गुफाओं के बारे में वैज्ञानिक कहते हैं कि यह उपाय किसी एलियंस के समूह ने बनाई है यहां पर एक विशालकाय कैलाश मंदिर है और किलोज Store के अनुसार इसे कम से कम 4000 वर्ष पूर्व बनाया गया था 4000000 टन की चट्टानों से बनाए गए इस मंदिर को किस तकनीक से बनाया गया होगा यह आज भी रहस्य बना है 4000 वर्ष पूर्व तो क्या आज की आधुनिक इंजीनियरिंग के जरिए भी ऐसी गुफा का निर्माण है नहीं किया जा सकता माना जाता है कि एलोरा की गुफाओं के अंदर नीचे सिगरेट शहर बसा हुआ है कमरूनाग झील हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों के बीच एक ऐसी झील मौजूद है जहां लाखों करोड़ों नहीं बल्कि से कहीं अधिक मूल्य का खजाना मौजूद है दिल में हर साल खजाना बढ़ता चला जाता है जिसमें लाखों रुपए ऊपर से देखे जा सकते हैं यह झील है मंडी जिले से करीब 7 किलोमीटर दूरी पर इसे कमरूनाग झील के नाम से जाना जाता है पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भक्त झील में सोने चांदी के गहने और पैसे डालते हैं सदियों से चली आ रही इस परंपरा के आधार पर माना जाता है झील के गर्त में अरबों का खजाना दबा है गर्मी के मौसम में तो सोना चांदी के जेवर साफ नजर आते हैं मान्यता है कि इस झील में सोना चांदी चढ़ाने से मन्नत पूरी होती है इसी कारण लोग श्रद्धा से यहां अपने शरीर का कोई गाना चढ़ा देते हैं यह सोना चांदी कभी भी झील से निकाला नहीं जाता क्योंकि लोग इस ईश्वर के खजाने के रूप में देखते हैं कोई भी इस खजाने को चुरा नहीं सकता क्योंकि माना जाता है कि कमरूनाग के खामोश रह रही इसकी रक्षा करते हैं वृंदावन कर रंग महल उत्तर प्रदेश के वृंदावन में स्थित के मंदिर आज भी अपने में कई रहस्य समेटे हुए हैं माना जाता है कि यहां आज भी हर रात कृष्ण गोपियों संग रास रचाते हैं यही कारण है कि सुबह खुलने वाले निधिवन को शाम की आरती के बाद बंद कर दिया जाता है उसके बाद वहां पर आना जाना मना है यहां तक कि दिन में रहने वाले पशु पक्षी भी शाम होते-होते निधिवन को छोड़ कर चले जाते हैं कहां जाता है कि यदि कोई छुपकर रासलीला देखने की कोशिश करता है तो पागल हो जाता है निधि वन के अंदर ही रंग महल मौजूद है मान्यता है कि रोज रात रासलीला के बाद राधाकृष्ण यहीं पर विश्राम करते हैं रंग महल में रखे चंदन के पल अंकुर राधा और कंहैया के लिए शाम को 7:00 बजे से पहले सजा दिया जाता है पलंग के बगल में एक लोटा पानी राधा जी की श्रंगार का सामान दातुन इरफान रख दिया जाता है इसके बाद रंग महल के दरवाजे पर छाता ले जोड़ती है चाहते हैं सुबह 5:00 बजे जबरन ग्मैल का दरवाजा खोलते हैं तो बिस्तर अस्त-व्यस्त लोटे का पानी खाली है और पान खाया हुआ मिलता है निधिवन के पेड़ भी बड़े अजीब है जहां एक और हर पेड़ की शाखा के ऊपर की ओर बढ़ती है वही निधिवन के पेड़ों की शाखाएं नीचे की ओर पड़ती है हराती है कि रास्ता बनाने के लिए पेड़ों को झंडू के सहारे रोका गया है रूपकुंड झील कंकाल झील के नाम से मशहूर इस झील का रहस्यमई झील के रूप में जाना जाता है रूपकुंड झील हिमालय पर लगभग 5000 29 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है अगर आप यहां पर जाते हैं तो इस दिव्य कुंड किया था गहराई और चारों ओर विक्रय नरकंकाल मन में को तू है प्रतिज्ञा शकरवार उत्पन्न कर देते हैं उनके रहस्य का प्रमुख कारण यह नर कंकाल ही तो है जो न केवल उसके इर्द-गिर्द दिखते हैं बल्कि तालाब में इन की परछाइयां भी दिखाई देती है नर कंकाल को लेकर क्षेत्रवासियों में अनेक प्रकार की किवदंतियां प्रचलित है वर्षों से इतिहासकार इनकम कालू के रहस्य का पता लगाने में जुटे हैं लेकिन अब तक तो कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है इनकम कालू को सबसे पहले साल 1942 में ब्रिटिश फॉरेस्ट गार्ड ने देखा था शुरुआत में माना जा रहा था कि नर कंकाल उन जापानी सैनिकों के थे जो द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान रास्ते से गुजर रहे थे लेकिन अब वैज्ञानिकों को पता चला है कि यह कंकाल 850 हिस्ट्री में यहां आए श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के हैं शोध से खुलासा हुआ है कि कंकाल मुख्य रूप से दो समूहों के है इनमे से कुछ कंकाल एक ही परिवार के सदस्यों के है जबकि दूसरा समूह अपेक्षाकृत कद में छोटे लोगों का है शोधकर्ताओं का कहना है कि लोगों की मौत किसी हथियार की चोट से नहीं BP चाय घातक तूफान की वजह से हुई है हड्डियों के फ्रैक्चर के अध्ययन से पता चला है कि मरने वाले लोगों के ऊपर क्रिकेट के गेंद जैसे बड़े ओले गिरे थे द कोंग्का ला दर्रा दुनिया की सबसे रहस्यमई इलाकों में से एक है लद्दाख का द कोंग्का ला दर्रा जिसके बारे में कहा जाता है कि अंतरिक्ष जीवो का गुप्त स्थान है और इसी कारण यहां पर कई बार यूएफओ के देखे जाने की बात सामने आई है स्थानीय नागरिक भी इन बातों की पुष्टि करते हैं वही 2006 के जून महीने में भी Google किस सैटेलाइट ने 2013 की कुछ ऐसी तस्वीरें ली थी जिनमें रहस्यमय को दिखाई देने का जिक्र है लेकिन इस जगह जाना सबसे कठिन माना जाता है क्योंकि यह बहुत ही पर शीला और दुर्गा क्षेत्र है और सबसे बड़ी बात यह है कि यह भारत चीन की विवादित जगह भी है जहां पर तू नजर रखते हैं लेकिन कोई ई जाने की हिम्मत नहीं करता चुंबकीय पहाड़ी लेह लद्दाख की खूबसूरती किसी से छिपी नहीं है लेकिन एक रहस्य ऐसा भी है जिसे देखने हजारों की तादाद में सैलानी पहुंचते हैं वह के लिए जाते समय आपको रास्ते में चुंबकीय ताकत वाला पहाड़ मिल सकता है यह कैसा पहाड़ है जो धातु को अपनी ओर खींचता है जब कारों का इग्निशन बंद कर दिया जाता है तब बेकार है इसकी और खींची चली आती है यानी कि आप गाड़ी को न्यूटल में कर दें तो पहाड़ी से नीचे खिसकने की बजाए ऊपर चढ़ने लगती है इसे दुनिया की ग्रेविटी हिल्स मैसेज करना चाहता है जुड़वा बच्चों का काम केरल के मलप्पुरम जिले में स्थित को भी नहीं गांव जहा जुड़वा बच्चों का जन्म होना आम बात है इस इलाके में दशकों से जुड़वा बच्चे पैदा होते हैं गांव में घर स्कूल बाजार हर जगह हम शकल नजर आते हैं कोई नहीं गांव में लगभग 2000 परिवार रहते हैं और शर्त कारी आंकड़ों के अनुसार इस गांव में ढाई सौ जुड़वा बच्चे हैं वही विशेषज्ञों के अनुसार इस गांव में साड़ी 300 से अधिक जुड़वा बच्चे रहते हैं हर साल जुड़वा बच्चों की संख्या बढ़ती चली जाती है इसके पीछे के कारणों को अभी तक कोई जान नहीं पाया है जिसके चलते यह गांव चिकित्सकों के शोधकर्ताओं के लिए रहस्य और दुनिया भर की मीडिया के लिए खबर बना है Judwaa लोगों में सबसे उम्रदराज 64 साल के बुजुर्ग से लेकर 6 महीने के बच्चे तक शामिल है अब तो इस इलाके में तितलियां नितिन बच्चों का भी एक साथ जन्म होना शुरू हो गया है एक और विशेष बात किया है कि यदि इन जुड़वा बच्चों में से कोई एक बीमार होता है तो दूसरा भी अवश्य बीमार हो जाता है इसलिए एक बच्चे के बीमार होने पर डॉक्टर दोनों बच्चों को दवाई देने के लिए कहते हैं शोधकर्ताओं को लगता है कि महिलाओं के खान पान की वजह से इस तरह का प्रचलन आम बात है मगर शोध के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिल पाए हैं I

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